Trilok Chand Jain 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक Chetan, jagran 44271 0 Hindi :: हिंदी
चेतावनी दे रहा ये दिन अब तो जागो रे चेतन।। बचपन में बड़े होने की चाह बढ़ना चाहा था अथाह, समय ने पलटा खाया, अब फिर बचपने का मन। चेतावनी दे रहा ये दिन, अब तो जागो रे चेतन।। पुस्तकों में रहकर खूब, जी चुराया था मैंने, छोड़ने की बेला में, फिर कर रहा अध्ययन। चेतावनी दे रहा ये दिन, अब तो जागो रे चेतन।। जो चाहा जो पाया नहीं, जो मिला वो रहा नहीं, जो रहा पसंद आया नहीं, दर-दर भटके यह तन। चेतावनी दे रहा ये दिन, अब तो जागो रे चेतन।। मंशाएं ना होती पूर्ण, सदा ही रहती अपूर्ण, प्राप्त ही पर्याप्त है, कर लो ये अवधारण। चेतावनी दे रहा ये दिन, अब तो जागो रे चेतन।।
Working Editor of Swadhyay Shiksha Magazine. Jainism teacher. Running Ph.D in Jain Jeevan Paddhat...