Rambriksh Bahadurpuri 31 Jul 2025 कविताएँ समाजिक #रामवृक्ष बहादुरपुरी #सरकार पर कविता #सरकारी तंत्र पर कविता #अम्बेडकरनगर पोइट्री साहित्यिक मंच 19156 0 Hindi :: हिंदी
तो अब समझ गया सुनते हो? ' नहीं ' बतलब बहरे हो ' नहीं ' कुछ कहते हो? ' नहीं ' मतलब गूंगे हो ' नहीं ' तो देखते होंगे? ' नहीं ' मतलब अंधे हो ' नहीं ' मतलब गांधी जी के बंदर हो ' नहीं ' तो अब समझ गया - तुम ' सरकार' हो। रचनाकार रामवृक्ष बहादुरपुरी अम्बेडकरनगर उत्तर भारत
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...