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आदमी आदमी को परेशान कर रहा है

Naresh kumar 28 Nov 2025 कविताएँ समाजिक आदमी,पडौसी, ऊंचा मकान, डाली धूप-छांव, बिल्ली, कीमत, 23003 0 Hindi :: हिंदी

पडौसी से ऊंचा, मकान कर रहा है
नहीं जितना उतना गुमान कर रहा है 
किसी को किसी का, सुहाता नहीं सुख 
आदमी, आदमी को, परेशान कर रहा है 
कोई कीमत गिराके, किसी का,भाव छीन रहा है 
कोई आगे खड़ा किसी की, धूप छांव छीन रहा है 
कोई बिल्ली की भांति , किसी का रास्ता काट देता है 
कोई हद मे आई हुई,, डाली छांट देता है 
सब अपना नंबर,, पहले लगाने की होड़ में है 
बेचारी इंसानियत,बस जीभ की मरोड़ में है 
सचमुच का तो बस खुद का ही, सम्मान कर रहा है 
आदमी आदमी को, परेशान कर रहा है

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