Komal Kumari 23 Apr 2023 कविताएँ समाजिक 55643 0 Hindi :: हिंदी
बड़ी आशाएं होती हैं एक लड़की की,उन आशाओं में रंग भरना उतना ही मुश्किल, मुश्किलों और जमाने से लड़,जब एक नारी निकलती हैं अपने सपनो की उड़ान के साथ , तो उन पंखों को कटने के लिए हजार अपने बैठे हैं महफिल में , महफिल बनी अपनो की, बेगानी एक नारी हो गई यह है जमाने जमाने की कहानी ,हर जमाने की नारी बदनाम हो गई।
#Mujhko pasand hai khud Ko hi padhna ek kitab hai mujhmein Jo mujhe aajmati hai. @ham Apne jivan ka...