Rambriksh Bahadurpuri 02 Jun 2025 कविताएँ दुःखद #Rambriksh Bahadurpuri 18480 0 Hindi :: हिंदी
पापा!
मैं बेटी हूॅं
कोई अपराध नहीं हूॅं
आप की आंखें क्यों नम हैं?
आप मेरे लिए भागवान हैं
कौन कहता है?
मेरी माॅं किसी देवी से कम है।
मैं भी जन्मी हूॅं माॅं की कोख से
पढ़ सकती हूॅं
बढ़ सकती हूॅं
दस कदम आगे हर पुरुष से ,
हम भी अपने में हम हैं,
आप को क्यों लगता है?
हमें बेटी होने का गम है
आप की आंखें क्यों नम हैं?
आप निराश क्यों हैं?
कर सकती हूॅं सारे करतब
चढ़ सकती हूॅं ऊंचे पहाड़
आप की सेवा
हम धर्म समझते हैं
धर्म निभाना ही
अपनी पूजा है
मैं समझती हूॅं
आप के जिम्मेदारियों की बोझ
हम पर किए गए आप की रोष
हमारी शादियां
हमारी आबादियां
हमारी सफलता
हमारी कुशलता
क्या यही आप के चिंता का कारण है?
हम जानते हैं
आप के संस्कार
आप की हिम्मत
त्याग
बलिदान
हमारे लिए
अस्त्र है शस्त्र है
आप से ही सीखा है
करने पर हर काम सुगम है
आप की आंखें क्यों नम हैं?
आप के खुशियों में
हमारी खुशी है
आप इतना
क्यों दुखी हैं?
हम रचेंगे इतिहास
पूरी करेंगे हम
आप की हर आस
क्यों नहीं है आप को
हम पर विश्वास
इस लिए कि हम बेटी हैं,
हमें गर्व है
हम आप की बेटी हैं
हमने भी आप के
हर मुश्किलों को देखी है
कर जाऊंगी काम
कर जाऊंगी नाम
गर्व होगा
देश को
लोगों को
कि बेटियों भी दम है
आप की आंखें क्यों नम हैं?
रचनाकार
रामवृक्ष बहादुरपुरी
अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...