Rambriksh Bahadurpuri 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक #Rambriksh Bahadurpuri #Rambriksh Bahadurpuri Ambedkar Nagar #Rambriksh Bahadurpuri kavita #Rambriksh Bahadurpuri Ambedkar Nagar kavita #Rambriksh kavita #Ambedkarnagar poetry poetry #aap chalen milkar chalen 124191 0 Hindi :: हिंदी
कविता -आओ चलें मिलकर चलें।
कहां जा रहा है अकेला
छोड़ अपनों का झमेला
जिंदगी अनमोल मेला
हम छोड़ इसको क्यों चले
आओ चलें मिलकर चलें।
सीखो नन्ही चींटियों से
उनके श्रम व पंक्तियों से
चार दिनों की यात्रा में
हम अपनों से क्यों लड़े
आओ चलें मिलकर चलें।
जाल में फस के कबूतर
खो चुके थे प्रश्न उत्तर
कांपते भय से उनके स्वर
फिर जाल को लेकर उड़े,
आओ चलें मिलकर चलें।
जीवन में थके जहां पर
विश्राम कर फिर वहां पर
तब खड़ा हो सांस भर कर
फिर मुस्कराते चल पड़े
आओ चलें मिलकर चलें।
खरगोश की न चाल चलकर
सो न जा विश्राम कर कर
चल चला चल दूर पथ पर
कछुआ सा मन धीर धरे
आओ चलें मिलकर चलें।
हाथ की पांचों अंगुलियां
देख लो उनकी अनूक्रिया
एक हों सब करतीं क्रिया
भगवान को भी वे गढ़े
आओ चलें मिलकर चलें।
ईर्ष्या है किस बात का फिर
धृणा किस जज्बात का फिर
प्रेम कर ले अपनों से मिल
जीवन जी ले भले भले
आओ चलें मिलकर चलें।
रचनाकार -रामबृक्ष बहादुरपुरी अम्बेडकरनगर यू पी
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...