Laxmi nishad 25 Jul 2024 कविताएँ समाजिक आंसू 30762 0 Hindi :: हिंदी
क्या कहती हो ठहरो नारी । संकल्प अश्रु - जल - से - अपने । तुम दान कर चुकी हो पहले ही जीवन के सोने से सपने । नारी ! तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास - रजत - नग पगतले। पीयूष - स्रोत - सी बहा करो , जीवन के सुंदर समतल में ।