संदीप कुमार सिंह 30 Apr 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाजिक हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 27505 0 Hindi :: हिंदी
आहत को राहत मिले, दे दूं उसको प्यार। गले लगा कर बात कर,जी भर करें दुलार।। आहत को राहत मिले,सुनकर अनुपम बात। बातों बातों में हुए,सुन्दर मीठी रात।। आहत को राहत मिले,देख फलक को यार। सुखद रक्त संचार से,पाया नव संसार।। आहत को राहत मिले,सुनकर पायल शोर। मन में उसके आस के,दिव्य हुआ तब भोर।। आहत को राहत मिले,भरे नेह से बोल। खुशी अलौकिक हो उसे,बंद हुए दुख होल।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....