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आई फ्लू-आंखे जो हर पल रहती हैं ख्वाबी

Aarti Goswami 20 Jan 2024 कविताएँ अन्य आखों पर कविता, आई फ्लू पर कविता 34086 1 5 Hindi :: हिंदी

"आई फ्लू"
आंखे जो हर पल रहती हैं ख्वाबी 
समय के प्रभाव में हो गई गुलाबी 
वैसे समय तो हर बार सताना हैं 
बस इस बार आंखो का बहाना हैं 
हर तरफ दिखने लगे यही चेहरे 
आखों पे लगा यू चश्मे के पहरे 
हर कोई इसी के शिकार ठहरे 
अब तो आंखे हो गई हैं दरिया
जैसे बहने लगी उसी से नदिया
जो हमेशा रहती सपनों से भरी
बन गई अब वो भी सूजी परी 
जब आंखे बीमार होने लगीं 
तब दर्द में हर पल रोने लगीं 
कहानी नही हैं कोई किताबी
अब आंखे होने लगीं हैं गुलाबी 
          ~'आरती गोस्वामी'✍️

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Aarti Goswami
Aarti Goswami ✍️

2 years ago

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