DIGVIJAY NATH DUBEY 30 Mar 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत दिग्दर्शन 93981 0 Hindi :: हिंदी
क्यू इंतजार रहता है आज कल नींद में आगोश हो जाने की जहां मुलाकात होती है तेरे चंचल नैनों से एक हवा के झोखों की तरह आकर यूं चले जाना तेरा इरादा यही की तुम्हे आगोश कर लूं जरा तुम्हे छू के देख लूं मैं खड़ा इंतजार करता हूं किसी सुदूर रास्ते पर तुम आती हो और अदृश्य होकर एक एहसास करा जाती हो उस एहसास के पल को समेटकर तेरी यादों का एक गट्ठर बनाकर उस परम अमृत को चीख लूं जरा तुम्हे छू के देख लूं ।।