DIGVIJAY NATH DUBEY 30 Mar 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत दिग्दर्शन 84293 0 Hindi :: हिंदी
काश हम तुम एक सफर में होते वो सफर जो खत्म ना हो सफर के रास्ते में वो प्यारी वादियां हो जो समेटने को तैयार हों अपने बाहों के आनंद में हम नदियों के झरनों को छूकर महसूस करते तो कितना अच्छा होता पहुंचकर किसी अंजान रास्तों पर इस दुनिया से अलग जहां प्रकृति की सुंदरता ही हमारे साथ की साक्षी होती जहां चहकते पक्षियों के धुन में धुन मिलाकर ताल करते जहां नदियों के कलकलाहट के मंद धुन में नृत्य करते जहां से लौट आने का मन न होता तो कितना अच्छा होता ।।