Anany shukla 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य अब तो तुम जिद छोड़ दो 127969 0 Hindi :: हिंदी
चुपचाप बैठ मैं देखता रहा, कभी पेड़ों की हिलती हुई पत्तियों को तो कभी उमड़ते हुए बादलों को न जाने कब यह बारिश कराएगी या यूं ही मेरे सामने से गुजर जाएगी मेघ तो सारे काले हैं पवन संग ये मतवाले हैं क्या इनसे मैं आस करूँ क्यों खुद अपना परिहास करूँ धरती सूखी ओंठ फटे हैं माथे पर दोनों हाथ सटे हैं इंतजार में तेरे इस चलते चलते पाँव फटे हैं अब तो जिद तुम छोड़ दो धरा को अम्बर से जोड़ दो कर दो बारिश फसलों पे मुस्कान दिला दो अधरों पे नहीं बरसेंगे ये बादल मिथक ये सारी तोड़ दो अब तो धरती को अम्बर से जोड़ दो