Chinta netam " mind " 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक समसामयिक 55517 0 Hindi :: हिंदी
छत्तीसगढ़ में तनख्वाह निकालने के एवज में बकरा भात की मांग और अनुकंपा नियुक्ति में रिश्वतखोरी घटना पर मेरी एक छोटी सी सम-सामयिक रचना......
// ...दे लात... //
अधिकारियों का संरक्षण ,
बाबुओं का साथ
वाह क्या जलवे हैं ,
वाह क्या बात....।
ऐसा ही रहे तो यूं ही ,
दिन हो या रात
चलता रहे इनका ,
बकरा और भात....।
आखिर कब तक ,
ऐसे ही चलता रहेगा ,
पत्रों का दौर
तारीख पे तारीख ,
होती मुलाकात पर ,
नहीं करते कोई बात....।
अब वह वक्त आ गया है साथियों,
पहले मुलाकात फिर बात
बात ना बने तो किसी नेता ने ,
कहा है-पकड़ो कॉलर दे लात..... ।।
चिन्ता नेताम "मन"
डोंगरगांव (छ.ग.)