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नानी की कहानियां

राकेश 22 May 2023 कहानियाँ बाल-साहित्य नानी की कहानियां, कहानियों का महत्व, नानी दादी की कहानियां 47562 0 Hindi :: हिंदी

रक्षा जब पांच वर्ष की थी, तब वह अपने नाना नानी के घर गई थी। इसलिए आठ वर्ष की रक्षा को अब नाना नानी के बारे में कुछ भी याद नहीं था।

इसलिए विद्यालय की गर्मियों की छुट्टी में नाना नानी से मिलने कि उसे हद से ज्यादा खुशी थी।

नाना नानी के घर जाने से एक दिन पहले वह अपनी सबसे अच्छी मित्र रागिनी के घर उससे मिलने जाती है।

रागिनी की मम्मी रक्षा और रागिनी की आपस में नाना नानी के घर जाने की बात सुनकर रक्षा से कहती है कि "रक्षा नानी के घर जा रही हो तो नानी से अच्छी अच्छी कहानियां सुनकर जब वापस अपने घर आओगी तो रागिनी और मुझे भी नानी कि वह कहानियां सुनाना।"
 
रक्षा कुछ सोचने के बाद रागिनी की मम्मी से पूछती है कि? "आंटी आपको कैसे पता मेरी नानी बहुत अच्छी अच्छी कहानियां सुनाती है।"

फिर रागिनी की मम्मी रक्षा से कहती है कि "तुम्हारी नानी ही नहीं सब बच्चों की नानी दादी अपने नाती पोतों को बढ़िया-बढ़िया कहानियां सुनाती हैं। मेरी नानी दादी भी बहुत अच्छी अच्छी कहानियां सुनाती थी। जब तुम अपनी नानी से कहानियां सुनकर अपने घर वापस आओगी और मुझे नानी की कहानियां सुनाओगी तो अपनी नानी से बचपन में कहानियां सुनने की मेरी भी सारी यादें ताजा हो जाएंगे।"
 
रक्षा अपने घर आकर सबसे पहले अपने माता-पिता से यह पूछती है कि? "क्या आपकी नानी दादी भी आपको अच्छी अच्छी कहानियां सुनाती थी।"

तो उसके माता-पिता कहते हैं कि "हमें तो बचपन में नानी या दादी से  कहानी सुने बिना नींद भी नहीं आती थी।"

माता पिता की यह बात सुनने के बाद रक्षा की अपनी नानी से मिलने की खुशी दुगनी हो जाती है। 

रक्षा अपने नाना नानी के घर पहुंच कर एक-दो दिन माता-पिता और मामा जी के साथ शहर की अच्छी खूबसूरत जगह घूमने में व्यस्त रहती है।

और जब उसके माता पिता रक्षा को गर्मियों की छुट्टी में नानी के घर छोड़कर वापस अपने घर आ जाते हैं, तो रक्षा उसी रात सोने से पहले अपनी नानी से कहानी सुनने की कहती है।

तो रक्षा की नानी रक्षा से कहती है कि "रक्षा बेटा मुझे तो इस समय कोई भी कहानी याद नहीं है और  मैंने आज तक किसी भी बच्चे को कहानी नहीं सुनाई है।" 

नानी की यह बात सुनने के बाद रक्षा नानी से कहती है कि "फिर तुम नानी कैसे बन गई, क्योंकि दुनिया में सब की नानी दादी तो बहुत अच्छी अच्छी कहानियां सुनाती है।

रक्षा की यह बात सुनकर नानी के चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है। 

रक्षा की नानी कल कहानी सुनाने का वादा करके किसी तरह उस दिन रक्षा को सुला देती है। लेकिन जब रक्षा की नानी रक्षा को कहानी सुनाने से रोज टालती रहती है, तो एक रात रक्षा उसी समय अपने घर जाने की जिद पर अड़ जाती है। और रोते-रोते चिल्ला चिल्ला कर कहती है कि "यह मेरी असली नानी नहीं है नकली नानी है।"

उस दिन रक्षा की नानी को एहसास होता है कि मैं शादी से पहले रात दिन अपने भविष्य के लिए चिंतित रहती थी। और शादी के बाद ग्रहस्त जीवन में उलझी रहती हूं। मैंने कभी यह नहीं सोचा कि कहानियों से मनोरंजन के साथ-साथ जीवन की समस्याओं को समझाने की शिक्षा भी मिलती है। 

इसलिए रक्षा की नानी उसी समय मोबाइल पर एक अच्छी सी कहानी पढ़ कर रक्षा को सुनाती है। 

और जब तक रक्षा उनके घर रहती है तब तक रक्षा की नानी प्रतिदिन रक्षा को नई नई कहानियां मोबाइल से पढ़कर सुनाती है। नई नई कहानियां पढ़ने से साफ साफ सुथरे मनोरंजन के साथ-साथ नानी कि दुनियादारी की समझ भी बहुत बढ़ने लगती है। और नानी के जीवन में नई ताजगी उमंग आ जाती है।

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