Chanchal chauhan 10 Jun 2023 कहानियाँ बाल-साहित्य एक मासूम बच्चा की कीस्मत 36159 2 5 Hindi :: हिंदी
एक मासूम सा बच्चा था। वह पांच साल का था उसकी माँ गुजर गई। उसके पिता ने दूसरी सादी कर ली। सौतली माँ का व्यवहार उसके लिए बहुत बुरा था। वह उसको बहुत डांटती मारती थी। खाना भी पेटभरकर नहीं देती थी। वह सात साल का हो गया । उस बच्चें से घर का काम भी कराती थी। झाड़ू पोंछा बरतन भी साफ कराती थी, उसका पिता कुछ नहीं कहता था। दूसरी पत्नी के चक्कर कुछ दिखाई देता था। बेचारे को माँ और बाप दोनों का प्यार नहीं मिला। वह स्कूल भी प्रतिदिन नहीं जाता था। उसकी सौतेली माँ चाहती वह उसे कहीं छोड़ आये। उनके गाँव के बहुत दूरी पर एक मेला लगता था। वह उस मेले में जाते हैं। उस मासूम लड़का को उसकी सौतली माँ अपने साथ रखती है। उसका हाथ पकड़े रहती हैं, मेले में बहुत भीड़ होती है, वह उसका हाथ छोड़कर जल्दी से वहाँ से निकल जाती हैं। बच्चा को जब सौतली माँ दिखाई नहीं देती वह घबरा जाता हैं,वह इधर उधर देखता है उसे कोई नहीं दिखाई देता, उसका पैर एक पत्थर से जाकर टकराता हैं वह नीचे गिर जाता हैं। तभी एक भला आदमी वहाँ आता है उसे नीचे गिरा देखकर उसे उठाता है। वो लड़का दर्द से चिल्लाता हैं, उसके सिर में चोट लग जाती हैं। चोट गुम होती है वह उस बच्चों को गोद में उठाता है। वह आदमी खुद डाक्टर होता है वह उसे दवाई देता है उसका दर्द कम हो जाता है। थोड़ी देर जहा भीड़ कम थी वहा पर बैठता है। उस बच्चें से उसका नाम पूछता है बच्चें डरा हुआ कुछ नहीं बोलता है।उसे कुछ याद नहीं रहता उसकी यादास जा चूकी होती हैं।जहाँ पर खोये हुए बच्चों का अलाउंस हो रहा था वह उस बच्चें को वहा ले जाता हैं। वहा पर उस बच्चें का अलाउंस कराता हैं। उसके रंग रुप उम्र कपड़े सब बता देता हैं। दो घण्टे हो जाते हैं उसे कोई लेने नहीं आता। वह आदमी भी सोचता हैं ऐसे कैसे माँ बाप हैं जिन्हें अपने बच्चें की फिकर नहीं। अलाउंस करवाने पर भी लेने नहीं आये।ऐसे कैसे मां बाप हैं, इतने मासूम बच्चें की याद ना आई कैसे छोड़ दिया।उनको खुद अलाउंस करवाना चाहिए था। कई घंटे हो गये। डॉ साहब की कोई औलाद नहीं थी। उन्हें बच्चों से बड़ा प्यार था वह संतान के ना होने पर बहुत दु:खी थे। उन्होंने उसको घर ले जाने का सोचा। वह उस बच्चों को घर ले गया। उसकी पत्नी गेट पर खड़ी अपने पति का इन्तजार कर रही थी। तभी गेट के सामने से बच्चें गुजर रहे थे वो उन्हें बड़े प्यार से देख रही थी, उनका कर रहा था मैं उन बच्चों को गोद में लू खिलाऊ, वह बस रुक जाती थी कोई उसे कुछ कह ना दे लोग उसे मारते थे बांझ हैं इसलिए वह अपना मन मार लेते थी। एक बार बच्चों को देखकर आंखो में चमक आ जाती थी, दूसरी बार आखों में आशू।डॉ की पत्नी की आखें आंशू से भरी थी। तभी डॉ साहब उस बच्चें लेकर आते है उनकी पत्नी देखती है उसे कुछ धुंधला सा दिखाई दे रहा था।अपने पति को आते देख उनकी गोद में बच्चें को उनकी आंखों में रोशनी छा गई। ये बच्चा कौन है वह दौड़ती हुई अपने पति के पास पहुंची। हड़वाते खुशी के साथ कहा, "ये बच्चा कौन है? उसके पति ने थोडे़ दुख और खुशी के साथ सब बताया। उसकी पत्नी ने खुशी के साथ उस बच्चें को गोद में लिया कहा, "कैसे माँ बाप थे जो इतने प्यारे बच्चों को छोड़ कर चले गये। उनसे पूछो जिनके पास अपने बच्चें नहीं हैं, भगवान् उनको बच्चें देते हैं वे उनकी कदर नहीं करते। वह उसको चूमती हुई घर के अंदर चली जाती है। उसे सोफे पर बिठा देती हैं उसके लिए पानी मीठा लाती हैं। फिर जल्दी से खाना लाती है अपने हाथों से गोद में बिठाकर खाना खिलाती हैं। आज एक माँ को ममता लुटाने वाला मिल जाता हैं। बरसो से तरसती माँ जीभर बच्चें को प्यार करती हैं, खूब लाड लड़ायी हैं। उसके सूने जीवन में बाहार आ जाती हैं। वह उस का अच्छे स्कूल में एडमिशन करा देते हैं। वह पढ़ने में होशियार होता हैं। उसकी पढ़ाई पूरी हो जाती है। वहर । वह कलेक्टर की पढ़ाई करता है। वह एक्जाम में पास हो जाता हैं। वह कलेक्टर बन जाता हैं।उसके माँ बाप बहुत खुश होते हैं। पूरी गाँव में उनका सम्मान बढ़ जाता हैं। एक दिन उस लड़के के ऑफिस में उस लड़के के गाँव से उसका बाप सौतेली माँ आती हैं।वह दोनों उसके रुम में पहुँच जाते हैं,वह लड़का उन्हें पहचान तो नहीं सही से उसे उन्हें देखकर कुछ धुंधला सा दिखाई देने लगता है,वे दोनों अपने लड़के का केश लेकर आते है।वह जेल में होता है।वह उन दोनों को जाने को कह देता है ।उसके सर में दर्द होने लगता है। वह घर आ जाता हैं रात में बहुत सोचता हैं, उसका सर फटने लगता हैं वह कमरे से बाहर जाने लगता है उस सर गेट से टकरा जाता हैं उसको बचपन की सब बातें याद आ जाती हैं ।वह अपनी माँ पापा को बताता हैं।वह उसकी माँ जाने को बोलते है।वह सुबह को गांव चले जाते हैं।वह उसकी उनके घर जाते हैं।उसकी सौतेली माँ घर पर होती हैं।वह कहती हैं, "आप यहाँ कैसे इस गरीब के घर ?"उनको नमस्ते करती हैं।उनको बिठाती हैं पानी लेकर आती हैं लड़के की माँ कहती हैं ,"मेरे लड़के को पहचाना कौन हैं? " वो कहती है, "ये कलेक्टर साहब हैं ।" उस लड़के की माँ कहती हैं, " ठीक से देखो ये वही लड़का हैं जिसे तुम मेले में छोड़ आई थी,तुम्हें इतने छोटे मासूम बच्चों को छोड़ते बिलकुल भी शरम नहीं आई दु:ख ,ना हुआ।सौतेली माँ बाद में पहले तो एक औरत थी,ममता तो होती हैं औरत में कैसा पत्थर मन था तुम्हारा। "वह सौतेली माँ चौंक जाती है उसे शरमन्दगी महसूस होती हैं।,वह माफी मागती हैं मुझसे गलती बहुत बड़ी गलती हुई बेटा मुझे माफ कर दे मैंने तुझे बहुत दु:ख दिया बहुत अत्याचार किया मेरे कर्म मेरे आगे आ रहे हैं।आज मेरी इकलौती औलाद जेल में हैं उसपर झूठा इल्जाम लगा हैं उसे बचा लो मैं तुम्हारे पैर पड़ती हूँ।वह लड़का कहता है ठीक हैं मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं आपकी वजह से मुझे इतने अच्छे माँ बाप माले हैं मेरी तकदीर अच्छी थी इतने प्यार करने वाले बहुत की स्मृति वालों को मिलते हैं।मैं आपके बेटे को जेल से रिहा करा दूगा।उस लड़के की मां भी कहती हैं , " कुछ भी हो मुझे भी एक बेटा मिला तुम्हारी वजह से लेकिन किसी की बच्चें की जिंदगी खराब भी हो सकती थी। वह दर दर ठोकर भी खा सकता था। किसी का भी बच्चा हो सीने से लगाकर रखो उसे दु:ख मत दे ओ। वह इतना कहकर चली जाती हैं।वह लड़का श्याम सौतेली माँ के बेटे को जेल से छुड़ा देता है।वह अपने माँ बाप के साथ खुशी से रहने लगता है।वह फिर एक गरीब अच्छी लड़की से सादी कर लेता है।उसके घर में खुशियाली छा जाती हैं। ।्श््श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््श्श्श्श्््श््श्श््श््श्श्््श््
2 years ago
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Mera sapna tha apne bicharo ko logo tak phunchana unko jiwn ki sikh ,prerna dena unmai insaniyat jag...