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कन्यादान- कन्यादान करने का शुभ अवसर

संदीप कुमार सिंह 08 Jun 2023 कहानियाँ समाजिक मेरी यह कहानी समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 30841 0 Hindi :: हिंदी

एक कहानी कुछ यूं है। कैलाश नाम का एक व्यक्ति था। पत्नी का नाम रीना था। दोनों का जीवन_यापन मजदूरी कर के चलता था। परिवार में इन दोनों की दो लड़की भी थी। गरीबी का ही हालात था लेकिन जिन्दगी ठीक_ठाक चल रही थी। लेकिन कहते हैं न की सु:ख_दु:ख दोनों भाई है। अब कैलाश और रीना के यहां भी दुःख ने दस्तक दे दिया था। एकाएक कैलाश की तबियत खराब होने लगी थी। धीरे_धीरे तबियत पूर्ण रूप से खराब हो गई थी। अब वह चलने_फिरने में भी असमर्थ था। उसे कोई जघन्य बीमारी ने ग्रसित कर ली थी। काफी इलाज कराने के बावजूद भी बीमारी भयावह होती गई। और एक दिन कैलाश ने इस दुनिया को अलविदा  कह दिया। अब तो कैलाश के परिवार का हालात अधिक ही बुरा हो गया था। वैसे दोनों बेटी निभा और विभा अब जवान हो गई थी। दोनों बेटियां भी अपनी मां के साथ काम पर जाया करती थी। इस तरह से फिर परिवार की स्थिति ठीक चल रही थी। लेकिन यह ठीक स्तिथि ज्यादा दिन नहीं चल पाई। क्योंकि बीमारी ने फिर से दस्तक दी और रीना को ग्रसित कर ली। ठीक वैसा ही हाल था जैसा कैलाश का हुआ था। दोनों बेटियां काफ़ी चिंतित और दुखित हो गई थी। उसे कोई चारा ही नहीं सूझ रहा था। पुकार नाम का उसका एक मौसा था। दोनों बेटियां अपने मौसा को बुला लाई। अब पुकार के आ जाने से निभा और विभा का हौसला मजबूत हुआ। मौसा के संग निभा और विभा अपनी मां की इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन होनी को कौन टाल सकता है। जो होने को होता है वो हो कर रहता है। धीरे_धीरे रीना ने भी चलना_फिरना छोड़ दी। उस से अब खाना भी नहीं खाया जाता था। एक दिन अचानक से रीना ने भी इस मायावी दुनिया को अलविदा कह दी। अब तो सारी जिम्मेदारी पुकार पर ही आ गई थी। दोनों भतीजी निभा और विभा जवान हो गई थी। पुकार सोच रहा था की जल्दी से दोनों के हाथ पीले कर दूं तो दिल को चैन आए। वैसे दोनों लड़कियां काम पर तो जा रही थी। पुकार भी काम पर जाता था। पुकार निभा और विभा को अपनी बेटी जैसी ही मान रहा था। पुकार बहुत ही खुश था दो_दो बेटियों को पा कर। अब वह दोनों के लिए लड़का देखना चालू कर दिया था। पुकार के किसी रिश्तेदार ने बताया कि मेरे गांव में एक ही परिवार में दो भाई शादी के योग्य है। पुकार शुभ दिन में उस गांव में लड़के के घर गया। उनके माता _पिता से मिला तथा शादी का दिन तय किया। लड़के के माता_पिता को सुन्दर_सुशील लड़की की आवश्यकता थी। इसलिए ज्यादा समय शादी का दिन तय करने में नहीं लगा। खुशी में झूमते हुए पुकार घर आया और यह खुशखबरी दोनों लड़की को दिया। कन्यादान करने का शुभ अवसर पाकर पुकार बहुत ही गर्वित था। और आज शादी का शुभ दिन आ ही गया। लड़के वाले बारात लेकर आए यहां पुकार ने भी सारी व्यवस्था किया हुआ था। आज पुकार के लिए जीवन का ऐतिहासिक और स्वर्णिम दिन था। दो_दो बेटियों का कन्यादान कर के पुकार अपने आप को धन्य समझ रहा था।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍️
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)
बिहार

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