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जीवन में संगीत का महत्व

राकेश 22 Nov 2023 कहानियाँ अन्य जीवन में संगीत का महत्व 45443 0 Hindi :: हिंदी

"राधेश्याम आज नाइट ड्यूटी बेसमेंट में करनी है आपको।" सुपरवाइजर प्रवीण झा बताता है 

"आज सर मेरी ड्यूटी अस्पताल के गेट या किसी वार्ड में लगा दे या मेरी ड्यूटी इमरजेंसी के गेट पर लगा दें, इमरजेंसी के गेट पर मेरी सात ड्यूटी पूरी हो गई है, लेकिन आज की रात में इमरजेंसी के गेट पर ड्यूटी करने के लिए तैयार हूं, क्योंकि आज मेरा मोबाईल खराब है, कम से कम उस भूतिया  बेसमेंट में संगीतमय गाने सुनकर रात तो कट जाती है।"

तू क्या बकवास कर रहा है तू यहां ड्यूटी करने आता है या मोबाईल पर गाने सुनने।", सुपरवाइजर प्रवीण गुस्से में कहता है 

और तुरंत ठेकेदार को सारी बात बात कर उसी रात राधेश्याम को नौकरी से निकाल देता है।

और नाइट ड्यूटी में जब एक सिक्योरिटी गार्ड काम हो जाता है, तो मजबूरी में सुपरवाइजर प्रवीण को खुद ही सुनसान बेसमेंट में नाइट ड्यूटी करनी पड़ती है और वह किसी दूसरे सिक्योरिटी गार्ड पर दबाव भी नहीं डालता बेसमेंट में  ड्यूटी करने का क्योंकि वह दूसरे सिक्योरिटी गार्ड्स को सबक भी देना चाहता था कि बेसमेंट की ड्यूटी इतनी खतरनाक नहीं है जितने तुम लोग समझते हो।

सुनसान बेसमेंट से सुपरवाइजर प्रवीन जब सुबह ड्यूटी करके बाहर निकाल कर आता है, तो सारे सिक्योरिटी गार्ड उसे देखकर उसकी मजाक उड़ाते हैं कि रात को बेसमेंट में सुपरवाइजर प्रवीण से कोई संगीतकार का भूत चिपट गया है क्योंकि जब सामने टेबल दिखाई देती थी या लोहे कि अलमारी तो सुपरवाइजर प्रवीन उन्हें  ढोलक जैसे बजाकर गाने गाने लगता था, कभी तेज कभी कम आवाज में था 

और सुपरवाइजर प्रवीण ठेकेदार से इजाजत लेकर राधेश्याम को दोबारा नौकरी पर रख लेता है। 

राधेश्याम उस रात नाइट ड्यूटी पर आकर सुपरवाइजर प्रवीण से पूछता है? "मैंने सुना है आप किसी को एक बार नौकरी से निकलने के बाद दोबारा नौकरी पर नहीं रखते हैं लेकिन मेरे ऊपर यह दया क्यों।"

"जो सुना था सच सुना था यह बात सच है, लेकिन अब कुछ और सुनो मेरे बारे में मुझसे खुद मैं जब बेसमेंट के सन्नाटे में बहुत अकेलापन महसूस कर रहा था और तभी मेरे गांव से फोन आया कि मेरे ताऊ जी का देहांत हो गया है और मेरी पत्नी को पास के अस्पताल में लेकर जा रहे हैं उसके प्रसव का दर्द तेज उठ रहा है, पहला बच्चा है इसलिए बेचारी बहुत डर रही थी और पीड़ा भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। मैं अकेला बेसमेंट में बैठा बैठा सोच रहा था कि अपने दिल के सारे भाव दिल से कैसे बाहर निकालु इसलिए मैंने अपने वृद्ध ताऊ को याद करने के लिए बच्चों के मधुर संगीतमय गीत सुने और जब ताऊ जी के साथ मेरी बचपन की यादें ताजा हो गई और फिर मैंने ताऊ जी को याद करके शोक के गीत सुने जब मेरे पास फोन आया कि मैं आप एक बेटी का बाप बन गया हूं, तो मैंने पिता संतान से संबंधित संगीतमय गीत सुने और मुझे पता ही नहीं चला कि कब मेरी नाइट ड्यूटी पूरी हो गई रात से सुबह हो गई, इसलिए उसे बेसमेंट की रात में मुझे समझ आ गया है कि संगीत के बिना हम अपने दिल के एक भी भाव प्रकट नहीं कर सकते हैं।

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