Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी

Shubhashini singh 30 Mar 2023 कहानियाँ अन्य Google /Yahoo/Bing 99381 0 Hindi :: हिंदी

       हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी

एक बार एक शहर में प्रतियोगिता हो रही थी।
वही शहर में रहने वाले कुछ लोग इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे थे।वही रास्ते से उमेश नाम का लड़का जा रहा था।
जो बहुत ही घमंडी किस्म का था, और घमंड भी क्यों न हो वो लंदन से पढ़ कर आया था।उसे देख ऐसा लगता मानो वो इस देश का है ही नहीं।
उसी शहर में रहने वाला एक अनुज नाम का लड़का था।
वो बहुत ही सीधा साधा था। अनुज और उमेश दोनों ही  दोस्त थे। उमेश हमेशा अनुज को अपने पढ़ाई का घमंड दिखता था। जिससे अनुज परेशान रहता था।अनुज  मध्यवर्गीय परिवार से था। बचपन में ही पिता का साया हट गया।और अनुज के ऊपर उसके परिवार की सारी ज़िम्मेदारी आ गई। वो चाह कर भी बाहर पढ़ने के लिए नहीं जा सकता था। अनुज एक मेहनती लड़का था। वो दिन रात मेहनत करके अपने परिवार का पालन पोषण करता था।और साथ ही साथ अपनी पढ़ाई भी पूरा किया। उमेश उसका बचपन का दोस्त था। बचपन में तो उमेश अनुज का साथ देता था।पर जैसे जैसे वो बड़ा हुआ।उसके अंदर अहंकार आ गया।
फिर भी अनुज उसकी बातो को दिल से नहीं लगता था। एक दिन वो दोनो साथ में घूमने जा रहे थे। उन्होंने देखा यहां प्रतियोगिता हो रही थी। दोनों ने सोचा कि क्यों न इस प्रतियोगिता में भाग लिया जाएं।अनुज ने उमेश से पूछा क्या तुम हिस्सा लेना चाहोगे। उमेश ने बोला हां क्यों नहीं आखिर मै लंदन में पढ़ा हूं मुझे यहां भला कौन हरा सकता है। अनुज हां बोलते हुए आगे बढ़ा जैसे ही दोनों वहां गए उन्होंने देखा कि यहां हिन्दी की प्रतियोगिता चल रही है अब इतने में उमेश बोला हिन्दी प्रतियोगिता भी कोई प्रतियोगिता है। जमाना बदल रहा है पर यहां के लोग नहीं बदल सकते। अभी भी वो अपनी घिसी पिटी हिन्दी पर ही टिके है। उन्हें पता होना चाहिए की हमारे लिए इंग्लिश कितनी जरूरी है। इतने पर ही अनुज ने उसको टोका और बोला तुमको इतनी ही इंग्लिश आती है।तो चलो आज देख ही लेते है की अब तुमको अपनी राष्ट्रभाषा कितनी आती है इतने पर उमेश बोला हा क्यों नहीं मै तो लंदन से पढ़ कर आया हूं यहां ऐसा कोई नहीं है जो मुझे हरा सकता।
अनुज उमेश की बात सुनकर मुस्कुराया और बोला चलो आज हम भी देख लेते है दोनों ही प्रतियोगिता में हिस्सा लिए। जब उमेश और अनुज को एक एक टॉपिक लिखने को दिया गया।तो वही उमेश की चहेरे की मुस्कान कही खो सी गई।क्योंकि वो अपनी भाषा ही भूल चुके थे। वो इस दुनियां की चकाचौध में इस तरह खो गए थे। कि उन्हें अपनी भाषा अपनी भारतीय होने का पहचान ही खोने लगे तब जाकर उमेश को ये एहसास हुआ कि वो कितना गलत था।
और उससे भी गलत उसकी सोच थी
और फिर दोनों ने इस प्रतियोगिता को पूरा किया।
इस प्रतियोगिता में जीत अनुज की हुईं। फिर अनुज ने आकर उमेश से बोला,क्या हुआ तुम तो लंदन से पढ़े हो और अपनी भाषा ही भूल गए।उमेश अनुज की बात सुनकर बहुत शर्मिंदा हुआ और तब जाकर उसे ये एहसाह हुआ। कि हम चाहे जहां भी रहे हम अपनी राष्ट्रभाषा कभी नहीं भूलनी चाहिए। हम जो है जैसे है हमें खुद को वैसा स्वीकर करना चाहिए। चाहे वो हमारी वेशभूषा हो या हमारी भाषा कभी अपनी भाषा बोलने या लिखने में शर्मिंदा नहीं होना चाहिए। ये हमारी पहचान हैं। और ये हमारी राष्ट्रभाषा है।
ना ही इंग्लिश बोलने से हम स्मार्ट कहलाएंगे और ना ही हिन्दी बोलने से हमरी बेइज्जती होगी। गर्व से बोलो हम भारतीय हैं। और हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी है।फिर देखो सारी दुनियां तुम्हारे सामने झुक ना जाए तो कहना।


                                                               सुभाषिनी सिंह 

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

बहुत समय पहले की बात है रहमान चाचा के यहाँ एक चूहा रहता था. हर दिन की तरह उस दिन भी बाज़ार से गाँव लौटते वक़्त चाचा झोले में कुछ सामान लेकर � read more >>
सच्चे भाई सुबह की योगा क्लास लेने के बाद मैं पार्क से होते हुए बाजार वाली रोड पर सैर के लिए निकल पड़ी । सुबह के व� read more >>
लड़का: शुक्र है भगवान का इस दिन का तो मे कब से इंतजार कर रहा था। लड़की : तो अब मे जाऊ? लड़का : नही बिल्कुल नही। लड़की : क्या तुम मुझस read more >>
Join Us: