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बचपन की पढ़ाई-कितने याद आते हैं वह बीते हुए दिन

DINESH KUMAR KEER 08 May 2023 कहानियाँ बाल-साहित्य 33659 0 Hindi :: हिंदी

बचपन की पढ़ाई
कितने याद आते हैं वह बीते हुए दिन नादान थे समझ नहीं था मासूम थे किसी के लिए जलन भावना नहीं था बस  खुशियां बहुत थी गम कुछ भी नहीं था।
एक बार की बात है मेरे बड़े भैया पढ़ाने बैठे मेरे साथ मेरे दो भाई बहन भी पढ़ने के लिए बैठे।
उस समय हम लोग अ ,आ ,इ, ई उ ,ऊ  मात्रा वाले छोटे-छोटे शब्द शब्द भैया पढ़ा रहे थे ।
भैया ने मुझसे बोला पढ़ने के लिए मैं जो भी शब्द पढ़ती  और जो सही होता था भैया उस हुकारी जरूर भरते थे।
उसमें एक शब्द लिखा था सबक मैंने तो पहले उसे सही पढ़ा पर जब भैया ने हुकारी नहीं भरी तो मैं समझी कि गलत है ।
तब मैंने सबक को सारे मात्राओं में पढ़ा  सबको  ,सबकी, सबके इसी तरह तब भैया गुस्सा हो कर मुझे नीम की डंडे से पिटाई की थी
और तब से ही मुझे यही  सबक मिला कि अपने आप पर विश्वास करके जो भी करो वह सही है किसी के हां या ना कहने से कोई मतलब नहीं है अपने आप पर विश्वास है तो सब सही है
बात तो छोटी सी है मगर सीख बहुत बड़ी है

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