AJAY ANAND 08 Apr 2023 कहानियाँ समाजिक अंतर्मन, मन की गहराई, प्रेम, भरोसा, विश्वास 31981 0 Hindi :: हिंदी
बात वर्षों पुरानी है , जब हम किसी के यहां पढ़ाने के लिए जाते थे। वो हमसे मात्र पांच वर्ष ही छोटी थी। उसे मैं विज्ञान और गणित पढ़ाता था। वह और उसका सात साल का भाई पढ़ता था। उसकी मां बैंक में काम करती थी तो घर से सबेरे ही निकल जाती थी क्योंकि उनका बैंक घर से पंद्रह किलोमीटर की दूरी पर था। हमें और भी मौका मिल जाता था। उसके साथ ज्यादा देर तक समय बिताने का। उसकी मां हमपर बहुत ज्यादा ही भरोसा करती थी। वह कहा करती थी — इसके पिता जी भी बाहर रहते हैं और मैं भी। आप देख ही रहे हैं बैंक में इतना काम रहता है कि रोज आने में लेट हो जाता है। बच्चों को अकेले घर में छोड़ना कितना मुश्किल है। किस पर भरोसा करें। बस आप को जानती हूं इसलिए पढ़ाने के लिए बोली। इन लोगों का देखरेख भी हो जाएगा और पढ़ाई-लिखाई भी। मैं भी हां में हां मिला देता। उसके मां के जाते ही वह कहती — मम्मी चली गई , अब मस्ती करेंगे। शायद मैंने महसूस किया जब-तक उसकी मां रहती। दोनों भाई बहन इतने खामोश रहते कि कोई देखकर कह ही नहीं सकता कि इतने दोनों इतने ज्यादा नटखट भी है। उसे पढ़ाने के क्रम में पता ही नहीं चला कि उसकी तरफ मैं कैसे आकर्षित हो गया। और वो भी बिना झिझक के हमें देखती। अपने पलकों को तब तक नहीं हटाती जब-तक हम उसे देखना बंद नहीं कर दें। किन्तु मेरे मन में उसके लिए गलत विचार कभी नहीं आया क्योंकि उसके मां का हम पर भरोसा था जो मैं टूटने देना नहीं चाहता था। परन्तु उसके आचरण को देखकर मेरे मन में प्रेम के साथ साथ क्रोध भी होने लगा था। गर्मियों की छुट्टी चल रही थी। बाहर जोर-जोर की हवाओं के साथ वर्षा आने की सम्भावना दिखाई दे रहा था। वह मेरे पास आकर बैठ गई। मैं और कुछ समझ पाता कि उसने मुस्कुराते हुए हमसे कहा — भैया रक्षाबंधन दो दिन बाद है। आप उस दिन आओगे ना। जानते हो आपके लिए हमने पॉकेट खर्च से पैसे बचाकर रखें है। उसी पैसे से आज राखी खरीदने जाउंगी। मैं जो सोच रहा था , मेरे मन में जो विचार थे उसके लिए , पल भर में गायब हो गए। उस समय हमने एक निर्णय लिया कि अगर कोई लड़की किसी को देखती है तो इसका मतलब यह नहीं कि उसके इरादे भी गलत हो। Ajay Anand … writer. What's app — 8309024238