Sweta Kumari 12 Dec 2024 कहानियाँ दुःखद आपी 29642 0 Hindi :: हिंदी
आ---pi की आवाज से मैं चौकी। दरवाजे की ओर बढ़ते कदम अचानक आवाज से ठिठक गये। तभी अनेक लोगों की आवाज सुनकर मैं जल्दी -जल्दी दरवाजे की ओर बढ़ी। दरवाजा खोलते ही सामने के दृश्य को देखकर मैं बेहोश हो गई।
जब मुझे होश आया,तो मालूम हुआ कि शाहिद इस दुनिया में नहीं रहा।
शाहिद से मेरा परिचय तब हुआ जब वह कोचिंग दसवीं कक्षा में दाखिला लिया। मैं उसी कोचिंग मे science की फैकल्टी के हैसियत से काम कर रही थी। यद्यपि teacher के लिए सभी छात्र एक समान होते हैं,किन्तु मेरा उसपर स्नेह कुछ ज्यादा था। इस का कारण क्या था। मैं नहीं जानती थी। यद्यपि शाहिद पढ़ने-likhne में बहुत तेज नहीं था। फिर भी उसकी आँखों में एक विशेष चमक थी।
बाद में एक दिन जब मैं मकान के लिए परेशान हो रही थी,तब उसने मुझे अपणे मुहल्ले के एक मकान के बारे मैं बताया। चूंकि मैं अकेले रहती थी इसलिए मेरे लिए वो छोटा सा मकान काफी था। मैं एक हिन्दू थी फिर भी मुसलामानों के मुहल्ले में मुझे रहने मे कोई खास परेशानी नहीं हुई उस मुहल्ले के बहुत बच्चे मुझसे ट्यूशन भी पढ़ने लगे। मेरे दिन आराम से कट रहे थे। तभी इस शांत माहौल में भूचाल आ गया।
मुझे अब भी याद है कि वह दिन सोमवार था। मैं जल्दी से अपने काम समेट कर नहा ली थी और पूजा पर बैठ गई। यद्यपि रात के समाचार में दंगों के विषय में कुछ कहा जा रहा था। तथापि मुहल्ले के लोगों की शालीनता और सद्भाव को देखकर यह sahaj अनुमान लगाया कि मेरा मुहल्ला इस मामले में शांत रहेगा।
अभी मैं पूजा समाप्त ही करने वाली थी कि जोरों से चीख सुनी-aa--pi ।
मैं तुरंत दरवाजे की ओर बढ़ी। देखा शाहिद की लाश मेरे दरवाजे पर पडी है और अनेक लोग हाथो मे हथियार लिए khade है।
शाहिद ने अपने आपी के लिए खुद को खत्म कर दिया।