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आखिर कब तक-दूसरो के लिए जीना हैं

Aarti Goswami 24 Jan 2024 कहानियाँ अन्य जीवन पर कविता, आखिर कब तक कविता 29956 1 5 Hindi :: हिंदी

"आखिर कब तक"

आखिर कब तक 
दूसरो के लिए जीना हैं 
खुशियों को खोना हैं 
खुद की इच्छा को त्यागकर
तकलीफों को अपनाकर 
ये जीवन जीना हैं 
सब का सोच के चलना 
सब के अनुसार ढल जाना
बातो की चाशनी में गुल जाना
आखिर कब तक 
बस यूंही चलते जाना हैं 
अपने दर्द को सहकर
हमेशा सब की सुनकर 
अपनी अच्छाई का यह तोहफा
आखिर कब तक लेना हैं 
      ~'आरती गोस्वामी'✍️

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Aarti Goswami
Aarti Goswami ✍️

2 years ago

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