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तुम्हारा राहों पे चलते- चलते बार बार पीछे मुड़ना

Samar Singh 10 Jun 2023 गीत प्यार-महोब्बत उनके मुहब्बत के इशारे भी गजब थे, हर एक अदा कयामत थी। 54040 0 Hindi :: हिंदी

तुम्हारा राहों पे चलते- चलते, 
बार- बार पीछे मुड़ना। 
तुम्हारा नजरे बचाकर मिलाना, 
मिलाकर नजरों को झुकाना। 

यह अदा एक भयंकर कयामत है, 
इस पर नहीं बचा कोई सलामत है। 
फिर हमारी क्या हालत है,
हाँ यही तो मुहब्बत करने की आदत है।। 

ये तेरी धीमी चाल, 
देख सबका हो जाता बुरा हाल। 
तेरी जुल्फों का लहराना, 
एक पल में सबको दिवाना बनाना। 
चलते- चलते तेरा ये चंचल, 
दुपट्टे का पीछे उड़ना। 
तुम्हारा राहों......................।। 

ये सादगी भी जानलेवा, 
दास्तां बयां क्या करूँ देवा। 
जीते जी मर जाए देखने वाले, 
नजर नहीं झुकती, ये तेरे हवाले। 
तुम्हारा  चलते- चलते
पैरों की पायल बनाने के लिए रुकना। 
तुम्हारा राहों.....................।। 

रचनाकार - समर सिंह " समीर G''

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