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सुख के साथी - मुक्तक छंद

संदीप कुमार सिंह 29 Apr 2023 गीत समाजिक मेरा यह गीत समाजिक हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 35275 0 Hindi :: हिंदी

करते रहते वाह,सैकड़ों सुख के साथी।
अन्दर रखते डाह,दांत रखते सम हाथी।
दुख में दे जो साथ,वही सच्चे हमराही_
यही मनुज पहचान,बनो कभी न मनमाथी। 
(स्वराचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍🏼
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

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