मोती लाल साहु 04 Oct 2025 गीत अन्य देह की नश्वरता से आत्मा की अनंतता तक 14146 0 Hindi :: हिंदी
काया माटी की, ये तो सब जाने, पर भीतर छुपा कोई और खजाना। ना कोई रंग, ना कोई आकृति, वो शुद्ध चेतना है, अमर ज्योति। हर जीव में समाया वो परम सत्य, जिसकी गूँज में सारा जग रमता। वो अनादि है, वो अनंत है, वो शाश्वत है। बाहर की दुनिया क्षण-भंगुर है, यहाँ मोह-माया की ही जंजीर है। पर जो निज को पहचान लेता है, वो इस बंधन से मुक्त हो जाता है। वो तत्व प्रेम है, वो तत्व ज्ञान है, वो ही ईश्वर का सच्चा वरदान है। अपनी जड़ को छू लो, शिखर मिल जाएगा, संपूर्णनता का मार्ग खुल जाएगा। -मोती