संदीप कुमार सिंह 19 May 2023 गीत समाजिक मेरा यह गीत समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 24168 0 Hindi :: हिंदी
सपने हों साकार तब, जब हो दृढ़ उत्साह। जोर शोर से मन लगा, करूं फतह हर राह।। सपने हों साकार तब,करिए श्रम दिन रात। जीवन में साधन रहे, लब पर मंजुल बात।। सपने हों साकार जब,खुशियां रहती खास। जीने में आता मजा,होता सब कुछ पास।। सपने हों साकार जब,सबसे रहता प्यार। प्रेम नेह से दिन कटे, रहे सुखी परिवार।। सपने हों साकार अब,समय सुखद है यार। हैं प्रभु ने सबकुछ दिए,साथी मिले अपार।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....