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रोटी की दरकार में-आया मैं परदेश

संदीप कुमार सिंह 06 Jun 2023 गीत समाजिक मेरा यह गीत समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 26062 0 Hindi :: हिंदी

रोटी की दरकार में, आया मैं परदेश।
पग पग पर बाधा मिली,आए काम सुरेश।।

रोटी की दरकार में,करते श्रम दिन रात।
होंगे तब भगवान खुश,खुशियाँ हो बरसात।।

रोटी की दरकार में,करता कई प्रयास।
आस नई से जागता,लिए सुखद अहसास।।

रोटी की दरकार में,आगे बढ़ते लोग।
तरह तरह से यत्न कर,सुन्दर करते जोग।।

रोटी की दरकार में,भूलूं कभी न आन।
रहता हूं नव जोश से,बना रहे दृढ़ मान।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍️
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)
बिहार

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