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पिताजी

ASHWANI PANDEY ( ADVOCATE ) 30 Mar 2023 गीत समाजिक पिताजी 66687 0 Hindi :: हिंदी

पिताजी

दु:ख तो गाँव-मुहल्ले के भी हरते आए बाबूजी
पर जिनगी की भट्ठी में ख़ुद जरते आए बाबूजी

कुर्ता, धोती, गमछा, टोपी सब जुट पाना मुश्किल था
पर बच्चों की फ़ीस समय से भरते आए बाबूजी

बड़की की शादी से लेकर फूलमती के गौने तक
जान सरीखी धरती गिरवी धरते आए बाबूजी

रोज़ अमीन वसूली की इक पर्ची पकड़ा जाता था
इज़्ज़त की कुर्की से हरदम डरते आए बाबूजी

हाथ न आया एक नतीजा, झगड़े सारे जस के तस
पूरे जीवन कोट-कचहरी करते आए बाबूजी

नाती-पोते वाले होकर अब भी गाँव में तन्हा हैं
वो परिवार कहाँ है, जिस पर मरते आए बाबूजी

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