संदीप कुमार सिंह 06 Jun 2023 गीत समाजिक मेरा यह गीत समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 25118 0 Hindi :: हिंदी
निंदा रस में लीन हैं, खूब आजकल लोग। दिखे ऐब खुद का नहीं,पाल रखा है रोग।। निंदा रस में लीन हैं,सभी मीडिया वर्ग। करते हैं बदनाम वो,करे स्वयं अतिसर्ग।। निंदा रस में लीन हैं,और करे व्यभिचार। किए दुश्मनी अक्ल से, होते तब लाचार।। निंदा रस में लीन हैं,करता नहीं विकास। इधर उधर में ही रहे,है गायब विश्वास।। नींदा रस में लीन हैं,कूटनीति में मस्त। शोषण खुद करवा रहा,किया सितारा अस्त।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....