संदीप कुमार सिंह 23 Jun 2023 गीत समाजिक मेरा यह गीत समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 39089 0 Hindi :: हिंदी
_कुंडलिया छंद "सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" माया में सब लीन है,भूल गए हैं मूल्य। सब रह जायेगा यहीं,जाओगे बन शून्य।। जाओगे बन शून्य,जन्म ले फिर से आना। फिर माया में फाँस,पाप ढो कर फिर जाना।। कहते कवि संदीप,वक्त मत करिए जाया। खुद को भी तो खोज,जरा निकलें से माया।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....