संदीप कुमार सिंह 23 Jun 2023 गीत समाजिक मेरा यह गीत समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 33435 3 5 Hindi :: हिंदी
मुक्तक छंद "सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" लालच जो मैं किया, बुरा हुआ तब हाल। छूटा सब दोस्त है,गड़बड़ है अब काल। बस पछतावा मिले, कुछ कर नहीं सकता_ सही राह चल रहा, निश्चय सुधरे चाल। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
2 years ago
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I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....