संदीप कुमार सिंह 11 Jun 2023 गीत समाजिक मेरा यह गीत समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 27689 0 Hindi :: हिंदी
किसने रोका है तुम्हें, अपनी दशा सुधार। मन में यह अब ठान ले,लेंगे सब अधिकार।। किसने रोका है तुम्हें, जीवन से कर प्यार। ताकि रहे नित चाँदनी,जीवन हो अभिसार।। किसने रोका है तुम्हें,रचना रचिए आप। जागृत करें समाज को,करें खत्म अभिशाप।। किसने रोका है तुम्हें,करने को निर्माण। अपना भाव उतार दे,लगे निशाने बाण।। किसने रोका है तुम्हें,खूब लीजिए श्वास। धड़कन को भी सुन लें, करें नहीं उपहास।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....