संदीप कुमार सिंह 21 Jun 2023 गीत समाजिक मेरा यह गीत समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 34828 0 Hindi :: हिंदी
(कुंडलिया छंद) जिसकी जैसी भावना, प्रभु का भी तस दृष्टि। वैसा ही वह कर्म कर,पाता आसी वृष्टि।। पाता आसी वृष्टि,तेज तब उसका बढ़ता। देता सबको लाभ,भाग्य तब कभी न घटता।। कहते कवि संदीप,खुशी जीवन में उसकी। रहे आंनद पास,साफ विचार हो जिसकी।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....