संदीप कुमार सिंह 16 Jun 2023 गीत समाजिक झाँझर मेरा दिल हुआ, भोली सूरत, देखकर, मचल, गया, संकट सब ही पार, संकट, अंजुमन, नयन नयन, नयन, मस्ती में चूर, निकला जो उदगार, विस्मय में डूब, रहा सतत ही देखता, गुलजार, शुक्रिया, दिल में आया प्यार, प्यार 32147 0 Hindi :: हिंदी
भोली सूरत देखकर,मचल गया मैं यार। झाँझर मेरा दिल हुआ,संकट सब ही पार।। भोली सूरत देखकर,अंजुमन में हर्ष। निकला जो उदगार तब,हुए सभी आकर्ष।। भोली सूरत देखकर,उलझन भागा दूर। नयन नयन से मिल गए,मस्ती में मैं चूर।। भोली सूरत देखकर,विस्मय में मैं डूब। रहा सतत ही देखता,बनकर दृढ़ महबूब।। भोली सूरत देखकर,रोम रोम गुलजार। शुक्रिया रब का मैं किया,दिल में आया प्यार।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....