संदीप कुमार सिंह 16 Jun 2023 गीत समाजिक रौनक मय जन जन लगे, मानवता का मोल, इंसान, जीवन सरगम, दिव्य, दिव्य पहचान, आधार, जगत, उपाय, जीवन संग्राम, सांस_सांस, जन _जन, सरस, सरस व्यवहार, महक, प्रसाद, खुशियाँ, अवसाद 29574 0 Hindi :: हिंदी
मानवता का मोल है,कहे उसे इंसान। जीवन सरगम सा रहे,मिले दिव्य पहचान।। मानवता का मोल है, यही जगत आधार। रौनक मय जन जन लगे,रहे सरस व्यवहार।। मानवता का मोल है,दुख का यही उपाय। जीवन के संग्राम में,पल पल राह दिखाय।। मानवता का मोल है,यह जीवन का इत्र। साँस साँस में हो महक,सब ही सबके मित्र।। मानवता का मोल है,जिससे मिले प्रसाद। खुशियाँ मय परिवार हो,दूर रहे अवसाद।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....