संदीप कुमार सिंह 10 Jun 2023 गीत समाजिक मेरा यह गीत समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 38247 0 Hindi :: हिंदी
दीनों तक पहुंची नहीं,उनकी जो है चाह। खा जाते हैं बीच में, और दिखाए राह।। दीनों तक पहुंची नहीं, दिए हुए खैरात। लोकल नेता खा गए, करे रंगीन रात।। दीनों तक पहुंची नहीं,सब साधन की युक्ति। बड़े बड़े होते चले,इनको मिले न मुक्ति।। दीनों तक पहुंची नहीं,जीवन की सब प्रीति। अपने मन को कोसते,उनकी यह है रीति।। दीनोंं तक पहुंची नहीं,सुमन खुशी की आस। दोषी किसको अब कहूं,लगते हैं उपहास।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....