संदीप कुमार सिंह 22 Apr 2023 गीत समाजिक मेरा यह गीत समाजिक हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 29834 0 Hindi :: हिंदी
चाहत कभी न यूं मरे, बड़े स्वप्न को देख। जिन्दा दिल हर पल रहें, प्राण बने नव लेख।। प्राण बने नव लेख,जिसे पढ़कर सब सीखे। और करे उत्कर्ष,रहे बनकर सब तीखे।। कहते कवि संदीप,हृदय मत करिए आहत। खुशियों का कर साथ,पूर्ण करिए सब चाहत।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....