संदीप कुमार सिंह 19 Jun 2023 गीत समाजिक बिखर रहे परिवार,सब अपने में डूब, बहुत गलत संदेश, करिए सभी विचार, रखें नहीं अब रोष 25278 0 Hindi :: हिंदी
बिखर रहे परिवार में, अमन चैन अब खूब। पता नहीं क्या हो गया, सब अपने में डूब।। बिखर रहे परिवार अब, बहुत गलत संदेश। करिए सभी विचार अब, देंगे साथ नरेश।। बिखर रहे परिवार जो,करिए मंथन आप। आपस में सब बात कर,दूर करें संताप।। बिखर रहे परिवार क्यों, देना होगा ध्यान। साझा करिए सोच को,रखिए कुछ विज्ञान।। बिखर रहे परिवार तो,ढूंढे अपना दोष। दूर करें सब दोष को,रखें नहीं अब रोष।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....