सागर राणा 20 May 2025 कविताएँ दुःखद 24416 0 Hindi :: हिंदी
मौत के आने पर तकलीफ़ होना लाज़मी हैं, पर इस तकलीफ़ की वजह क्या हैं? इन नीले शबनमी नैनों में अश्कों की वज़ह क्या है? माना जिस्म के रूह से आज़ाद होने पर तकलीफ़ होना लाज़मी है, पर इस तकलीफ़ की वजह क्या हैं? क्योंकि आज़ादी तो उस पंछी की तरह हैं, जिसकी उड़ान की कोई सीमा नहीं, और न ही वे किसी डाल की मोहताज़ हैं। पर हम नासमझ आंखों में बेसब्री परोसे उसके वापस घरौंदे में लौटने का इंतजार करते हैं। पर हम ये कैसे भूल जाते है, की वे हमसे दूर तो हैं पर इतना दूर भी नहीं की इस दिल में न समा सके।