आदित्य मौर्य'आर्यवंशी' 16 Apr 2023 कविताएँ समाजिक 29761 0 Hindi :: हिंदी
हम कौन थे.....
कहां पर रहे हैं कहा जा रहे हम।
पश्चात सभ्यता में पलते जा रहे हम।।
यहीं के जगत गुरु थे सारे जहां के ।
वेदों की ज्ञान गंगा बहती थी जहां पे।।
अहिंसा के पुजारी थे आज हिंसक बन गए हम।
कहां पर रहे हम कहां जा रहे हम।।
दही- दूध नदी बहती थी अमृत की धारा।
सोने की चिड़िया कहा जाता था देश हमारा।।
देश है स्वतंत्र पर कैसी ये आज़ादी।
देश- जाति , धर्म की हो रही बर्बादी।।
टुकड़ों में टुकड़े-टुकड़े बाटते जा रहे हम।
कहां पर रहे हम कहां जा रहे हम।।
कैसी थी संस्कृति और सभ्यता हमारी ।
शाकाहारी खान पान ना कोई मांसाहारी।।
आज गलत खान-पान में पड़ते जा रहे हम।
कहां पर रहे हम कहां जा रहे हम।।
काव्य -आदित्य मौर्य 'आर्यवंशी'
I am the student of class 10th Amrit Public School situated in Mau District ,Uttar Pradesh 275101...