लेखक भावों का भण्डार हैं,
उनको समझने वाला, कलाकार हैं,
ना धोखा, छल,ना माया का गुलाम हैं, हैं वो शब्दों की कैद में,बस भावों का संचार हैं,मन � read more >>
लो फिर उठा दी मैंने कलम लो फिर उठा ली मैंने कलम। जैसे घर के होते काम अनेक नहीं मन करता कि उठाऊं मैं कलम। ‌‌‌‌ लेकिन हो रहा जब जुर read more >>