Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

शिक्षक-दिवस पर विशेषः सर्वपल्ली राधाकृष्णन

virendra kumar dewangan 30 Mar 2023 आलेख अन्य भारत के राष्ट्रपति 96904 0 Hindi :: हिंदी

शिक्षक-दिवस पर विशेषः
सर्वपल्ली राधाकृष्णन 
भारत के दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक शिक्षक थे। वे शिक्षक रहते हुए देश के सर्वौच्च पद पर पहुंचे थे। उन्होंने अपना जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा व्यक्त की थी। इसलिए, उनके जन्म दिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। 
उनका जन्म 5 सितंबर 1988 को तमिलनाडु के तिरूवनि नामक स्थान में हुआ था, जो चेन्नई से 64 किमी उत्तर-पूर्व में है। वे 40 वर्ष आदर्श शिक्षक रहे। वे सास्कृतिक चेतना से ओत-प्रोत एक महान शिक्षाविद, महान दार्शनिक, महान वक्ता और आस्थावान हिंदू विचारक थे। 
वे भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति 1952 से 1962 तक रहे। तब भारत के राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद थे। वे 13.05.1962 से 13.05.1967 तक वे भारत के द्वितीय राष्ट्रपति रहे। उनके कार्यकाल की दुःखद घटना चीनी आक्रमण-1962 था, जिसमें भारत को शर्मनाक पराजय का सामना करना पड़ा था। 
उनके कार्यकाल में ही 1965 में पाकिस्तान ने आक्रमण किया था, जिसमें पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी थी। तब भारत के प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री थे। इस युद्ध को सोवियत संध के हस्तक्षेप से विराम दिया गया और ताशकंद में भारत-पाक का समझौता हुआ।  उनका निधन 17 अप्रेल 1975 को हो गया।
उन्होंने धर्म, संस्कृति व विज्ञान पर कई किताबें लिखीं। उन्हें 1931 में नाइटहुड की उपाधि मिली। उन्होंने 1949 से 1952 तक देश का यूनेस्को में प्रतिनिधित्व किया।
शिक्षा को लेकर उनके विचार हैं,‘‘शिक्षा केवल आजीविका प्राप्त करने का साधन नहीं है, न ही वह नागरिकों को शिक्षित करने का अभिकरण है, न ही यह प्रारंभिक विचार है। यह जीवन में आत्मा का आरंभ है, सत्य तथा कर्तव्यपालन हेतु मानवीय आत्मा का प्रशिक्षण है। यह दूसरा जन्म है, जिसे ‘दिव्यात्म जन्म’ कहा जा सकता है।’’
वे समूचे विश्व को एक विद्यालय मानते थे। उनका कहना था कि शिक्षा द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जा सकता है। वे साधारण शिक्षक से कई विश्वविद्यालयों के चांसलर तक रहे। वे अपने दर्शन, चिंतन और उत्कृष्ट अध्यापन के बूते देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचे। उन्हें 1954 में भारतरत्न से सम्मानित किया गया। 
				--00--
अनुरोध है कि लेखक के द्वारा वृहद पाकेट नावेल ‘पंचायतः एक प्राथमिक पाठशाला’ लिखा जा रहा है, जिसको गूगल क्रोम, प्ले स्टोर के माध्यम से writer.pocketnovel.com पर  ‘‘पंचायतः एक प्राथमिक पाठशाला veerendra kumar dewangan से सर्च कर या पाकेट नावेल के हिस्टोरिकल में क्लिक कर और उसके चेप्टरों को प्रतिदिन पढ़कर उपन्यास का आनंद उठाया जा सकता है तथा लाईक, कमेंट व शेयर कर लेखक को प्रोत्साहित किया जा सकता है। आपके सहयोग की प्रतीक्षा रहेगी।

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

छेड़ते हुए लड़के ने लड़की से कहा- तुम कितनी सुन्दर हो तुम्हारी आँखे तो ऐसी हैं जैसे समुन्दर हो तम्हारे होठ लाल ऐसे हैं जैसे चुकन्दर ह� read more >>
हमारे देश में बहुत से महापुरुष हुए, बहुत से नेता हुए जिन्होने देश के लिये अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिये, सिर्फ देश की एकता व अखण्डता क� read more >>
किसी भी व्यक्ति को जिंदगी में खुशहाल रहना है तो अपनी नजरिया , विचार व्यव्हार को बदलना जरुरी है ! जैसे -धर्य , नजरिया ,सहनशीलता ,ईमानदारी read more >>
Join Us: