Rajnish khandal 27 Mar 2025 कविताएँ समाजिक संगठन 27725 0 Hindi :: हिंदी
शीष केवल एक हो,
पर कार्य उसके नेक हो।
जो सम्भा बन दहाड़ दे,
तन - मन देश पर त्याग दे।
म्यान में तलवार ले,
ललाट पर टीका लाल ले।
अखण्ड एक विचार ले,
प्रचण्ड वो दहाड़ दे,
खण्ड खण्ड साथ ले,
अखण्डता का ज्ञान दे।
जहां राह सुनसान हो,
और देश का गान हो।
उस भू पर एक दहाड़ दे,
जन-जन को राष्ट्रीयता का राह दे।
वहां दूर एक नीड़ है,
उपस्थित वहां भीड़ है।
सुन के एक विचार ले,
जो जन-जन में तार दे।
एक ऐसा आरम्भ हो,
जहां हर कोई दंग हो।
घुल - मील प्रचण्ड बने,
जिससे भारत अखण्ड बने।
अगर ऐसा एक विचार है,
तो ये खाण्डल तैयार है।
तुम नीचे अपना विचार दो,
जिससे राष्ट्र शुभचिन्तक साथ हो।
रचनाकार = रजनीश खाण्डल