मोती लाल साहु 23 Aug 2025 कविताएँ अन्य खोज: "यह रचना शरीर को एक मंदिर के रूप में दर्शाती है, जहाँ हर अंग और विचार का अपना महत्व है, और इन सबको नियंत्रित करने वाली सर्वोच्च शक्ति ईश्वर है। यह पाठ लोगों को अपने शरीर को सम्मान देने और अति उत्तम जीवन जीने के लिए प्रेरित करेगा" 11737 0 Hindi :: हिंदी
हमारे भीतर ही है, यह अद्भुत संसार। पाँच ज्ञान, पाँच कर्म, अंतःकरण के चार। नेत्र देखें संसार, रूप-रंग और आकार। कान सुनते ध्वनि, मीठे बोल की पुकार। नाक से लें सुगंध, प्रकृति की सौगात। जीभ चखती स्वाद, जीवन की हर बात। त्वचा से हो स्पर्श, शीत-ताप का आभास। ये पाँच ज्ञान के द्वार, देते हमें प्रकाश। हाथ करें सब काम, दें सबको सहारा। पैर चलें पथ पर, पावन हो हर धारा। मुख से निकले वचन, जो दिल को छू जाए। कर्म इंद्रियां ये पाँच, सेवा का पाठ सिखाए। मन है चंचल बड़ा, विचार अनंत समाए। बुद्धि देती विवेक, सही-गलत समझाए। चित्त में सब कुछ अंकित, यादों का भंडार। अहंकार का त्याग ही, सच्चा मुक्ति का द्वार। ये चौदह हैं सेवक, शरीर के भीतर। परम सत्ता एक ही, जो चलाए सब मिलकर। हृदय में जो बसे है, वह है ईश्वर का वास। यह देह एक मंदिर, और प्रभु हैं इसका प्रकाश। -मोती