की बेहत दिन हो गये, कूच लिखा नहीं है!
लिखने के लिये तूमसा कोई मिला नही है!
और पकड लू कलम हातो मे अपणी तो,
शब्द नहीं यार तुम्हारी तस्वीर नि� read more >>
कल की ही तो बॉत थी, जब पिता का हॉत थामें में चल रहाँ थॉ!
ना जाने कब जिम्मेदारियो के साथ जवानी आगई,
और देखते ही देखते जिदंगी ने तजुर्बे के � read more >>