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Samar Singh
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Samar Singh
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@ samar-singh
, Uttar Pradesh
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शबनम किसी के आँसू हैं!
रात बीतती चली गयी, सुबह होकर भी शाम में बदल गयी। यह कैसा है मुहब्बत का फसाना, जो थी अपनी कहानी, गैर के नाम में बदल गई।। चाँद था प्यारा �
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पहले चेहरे पढ़ने का शौक नहीं था
पहले चेहरे पढ़ने का शौक नहीं था, अब देखता हूँ हर इंसान का चेहरा। हर इंसान में नहीं होते भगवान, कई चेहरों पे होता है शैतान का पहरा।। क�
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होली की सितम
फिर आई दर्द लेके होली, सारे गुलाल उड़ रहे। उनकी एक याद है कि, जो मलाल की जड़ रहे।। बेचैनियाँ रंगों की मानिंद, जीवन में एक फुहार की तर�
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हर मंजर बदल गये।
हर तरफ है धुँआ, अचानक एक पल में क्या हुआ? सामने आँखों के , हर मंजर बदल गए। आँखों में एक पहरा, जख्म देख जरा गहरा। दिवानों के कत्ल में स�
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जिंदगी की कहानी
कहानी दो पल का गम, कई सदी कह गया। मेरी आँखों में सिर्फ, एक बियावान मंजर रह गया। तड़प हर रोम- रोम की, मैं अब भी सुन रहा हूँ। बीते हुए प
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राह में थी एक रंजिश रंजिश
रंजिश राह में थी एक रंजिश, ठोंकर लगा के पछता रहे हैं। पाँवों के दर्द अब भी, बनकर नासूर की तरह सता रहे हैं।। उस राह पे न चल, जिसकी कोई �
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मैं दर्द बेचने निकला हूँ।
इस भीड़ भरे बाजार में, हर एक चीज बिक रही है। लगाए अपना मजार कहाँ, कोई ठौर नहीं दिख रही है। दर्द जो दिल में था कब से, आज आँसू बन के पिघला �
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ये कौन आ गया!
ये कौन आ गया, दिल को एक ठंडक सी हुई। सोये हुए खाबों में, फिर एक दस्तक हुई।। क्यों लगता है दिल को, एक हवा खुशबू की जैसे आती है। आँखों म�
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फिर भी हमने अपना नम्बर नहीं बदला
कुछ वादे थे, या सिमकार्ड के कीमत ज्यादे थे, मैं समझा नहीं क्या उनके इरादे थे,। जमाना बदला, तकदीर पर कई बार हुआ हमला, फिर भी हमने अपना न�
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प्यासा पतझड़
किसी के आने की उम्मीद है, एक नशे की नींद है। नई कोंपले तराशे है, पतझड़ प्यासे हैं। मदमस्त हवा कहती है, पत्ते गिरते है, सरगम बजती है।
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