न शौक, न श्रृंगार ,न इच्छा न चाह हो,
न दु:ख हो न दर्द हो,कठिन भले ही राह हो,
तेरे बिना रहना कैसा?भाये भला तनहाइयां?
बनकर सदा चलता रहूं ,अमिट � read more >>
भटक रही थी बूढ़ी महिला
तम तमाती धूप में |
अधमरी सी झुकी खड़ी थी,
कंकाल के रूप में ||
उपल ,कण्डा उठा उठा कर ,
भर रही थी टोकरी. |
चाह जीने की प् read more >>
भटक रही थी बूढ़ी महिला
तम तमाती धूप में |
अधमरी सी झुकी खड़ी थी,
कंकाल के रूप में ||
उपल ,कण्डा उठा उठा कर ,
भर रही थी टोकरी. |
चाह जीने की प् read more >>
बोया था मिट्टी में बीज
यह सोचकर, पेड़ बनेगा |
छाया देगा जीव जंतु को ,
फल भी सारा ढेर लगेगा ||
रोज देखता कब निकलेगा ,
नन्ना मुन्ना अंग सलोन� read more >>