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Rambriksh Bahadurpuri

Rambriksh Bahadurpuri

Rambriksh Bahadurpuri

@ rambriksh
, Uttar Pradesh

I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote many poems to you

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न शौक, न श्रृंगार ,न इच्छा न चाह हो, न दु:ख हो न दर्द हो,कठिन भले ही राह हो, तेरे बिना रहना कैसा?भाये भला तनहाइयां? बनकर सदा चलता रहूं ,अमिट � read more >>
शीर्षक- बढ़ते कदम मुसाफिर! तान ले यदि तीर अपना मंजिल की ओर सोंचकर उम्मीदों पर खरे उतर रहे हम , दुनिया तुम्हारा नाम क्यों याद � read more >>
सहसा एक दिन नजर पड़ा छत के एक घोंसले पर लगा सोचने बड़े देर तक विधि की है कैसी माया प्यार कहूं कि स्वार्थ कहूं? देख मां बच्चे पर छाया च� read more >>
गिल्ली डंडा बाघा बीता छुक छुक इंजन वाला खेल, दिन भर आना जाना रहता सबसे होता रहता मेल, सुख-दु:ख की सब बात समझते, अपनापन के फूल थे � read more >>
भटक रही थी बूढ़ी महिला तम तमाती धूप में | अधमरी सी झुकी खड़ी थी, कंकाल के रूप में || उपल ,कण्डा उठा उठा कर , भर रही थी टोकरी. | चाह जीने की प् read more >>
भटक रही थी बूढ़ी महिला तम तमाती धूप में | अधमरी सी झुकी खड़ी थी, कंकाल के रूप में || उपल ,कण्डा उठा उठा कर , भर रही थी टोकरी. | चाह जीने की प् read more >>
मानव मुस्कान भरो मन में जीवन नीरस न बनने दो, किसलय कुसुम सा खिलने दो, भार बनो न धरती का, जज्बा रखो कुछ करने का, भौंरे गुनगुनाने दो कानन म read more >>
बोया था मिट्टी में बीज यह सोचकर, पेड़ बनेगा | छाया देगा जीव जंतु को , फल भी सारा ढेर लगेगा || रोज देखता कब निकलेगा , नन्ना मुन्ना अंग सलोन� read more >>
न महलों बीच उजाला हूं मैं न ज्वालामुखी का ज्वाला हूं मैं न आसमान का तारा हूं मैं न मेघ बीच चंचल चपला, न अग्नि बीच अंगारा हूं मैं मन उ� read more >>
कल से कल तक ले आज खड़ा हूं हर युग हर पल कण-कण में पड़ा हूं राग रागिनी निडर निर्भय हूं घात अघात घातक प्रलय हूं क्योंकि मैं समय हूं | ह read more >>

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