माँ मैं हूँ नन्ही सी प्यारी एक बच्ची हूँ .. माँ मैं तेरी लाडली
नन्हें-नन्हें हाथ - पाँव हैं मेरी
चलती हूँ मै ठुमुक - ठुमुक
कभी गिरती तो कभ� read more >>
मैं लौटा अपने गांव में जब
नहीं मिला मुझे देखने को
कोई भी खेत -खलिहान
भैया - भाभी , चाचा -चाची
सब बन गए थे नया दुकानदार
बाग-बगीचा , पार्क ब� read more >>
मैं जिस जगह पे, रहता था ।
वहाँ न कोई आता - जाता ।
चारों तरफ जो, थी सूखी नदियाँ
न था उसमें थोड़ा सा भी पानी
खेत - खलिहानों में फसलें न थी ।
पड read more >>