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नीतू सिंह वसुंधरा

नीतू सिंह वसुंधरा

नीतू सिंह वसुंधरा

@ ms-nitu-singh
, Uttar Pradesh

मै नीतू सिंह वसुंधरा मऊ उत्तरप्रदेश से । मैं अपनी रचनाओं को व्यक्त करती हूं । मैं प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हूं। मेरा हमेशा से हिंदी साहित्य की सोई हुई प्रतिभा जागने का प्रयास रहा हैं जिसके अंतर्गत अपने टूटे फूटे शब्दो के माध्यम से रचना करने का प्रयास कर रही हूं। धन्यवाद !

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My Articles

प्रेम से जिसने जग को मोह लिया, आपने पिता के वचनों के खातिर, राज -पाठ से भी मुंह मोड़ लिया, 14 वर्ष वनवास किया, हर कठिनाई से लड़ने का प्रयास � read more >>
मां की महिमा रूप जिसका विकराल है , जो काल की भी काल है, महिमा जिसकी निराली है, वो मां काली है हर नारी में उसका बास है शिव भी जिसके सामने ग� read more >>
मानुष के पौरुष का गुणगान मानुष के पौरुष का गुणगान करने आया हूं। मानव ही लौह स्तंभ बना, मानव ही तो प्रहरी है। मानव की इस गाथा से ,मानव जन read more >>
अपनों के साथ विश्वास घात अपने ही बन गए लड़कियों के लिए जल्लाद। अपनों ने ही किया लड़कियों का अपमान। आसान नहीं है लड़कियों का कल ए खुदा read more >>
बेटियों की राह मैं बेटी हूं यह मेरा गुनाह है, सरल नहीं मेरी राह है, मेरी भी तो कुछ चाह है, अंधेरे में मेरा कल है, रब कर दे इस मुश्किल का हल read more >>
मुसाफिर आगे तू चल मुसाफिर, आगे ही तेरी मंजिल है। भूल जाओ उसको जो तेरी भूल है। भूल था तू अब उठा है। मंजिल पाने का जुनून तुझ में जगा हैं म read more >>
जिंदगी खाली हाथ आया है तो खाली हाथ जाएगा। जिंदगी माया है, तू एक दिन सब भूल जाएगा। जिंदगी ना सरल है , यह बहता हुआ जल है, मुट्ठी के रेट के � read more >>
शक्ति की पूजा मैं अर्ध शतक नारीश्वर हूं, नारी के मन का ईश्वर हूं। जो मन नारीश्वर हो न सका, वह कभी शक्ति को अभिभूत कर न सका। नारी तो शक्त read more >>
जिंदगी एक तन्हाई तन्हाई के उन पलों को मैं कैसे भूल जाऊं। जो मुझे अपनों के साथ रहते हुए भी अपनापन नहीं। मैं अपनों को अपनाते अपनाते हैं read more >>
बचपन का साथी बचपन का साथी कब राहों में खो गया, यह पता चला ही नही। मैं बच्चा से कब बड़ा हो गया ये पता चला ही नहीं। बचपन के वो लम्हे जो हर स� read more >>
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