नीतू सिंह वसुंधरा 03 Oct 2023 कविताएँ समाजिक नीतू सिंह वसुंधरा 41299 0 Hindi :: हिंदी
अपनों के साथ विश्वास घात अपने ही बन गए लड़कियों के लिए जल्लाद। अपनों ने ही किया लड़कियों का अपमान। आसान नहीं है लड़कियों का कल ए खुदा कर दे लड़कियों के लिए मुश्किल हल। थोड़ा कर लो उनका भी सम्मान जो लक्ष्मी कहलाती हैं। जब घर से जाती हैं तू दूसरी लक्ष्मी आती है, नाम क्यों बदल गया उनका, क्यों बहुएं नहीं बेटियां कहलाती हैं। ए खुदा इस मुश्किल का हल दे दो, फिर चाहे वो कल दे दो, पर बहू बेटियों के साथ गलत करने वालों को उसका फल दे दो, लक्ष्मी में भी शक्ति है, दूसरा नाम भी शक्ति है, अगर वो अपना बल दिखा देगी। जल्लादों को ज्वाला में जला देगी, मिट्टी में मिला देगी। जल्लादों का अस्तित्व मिटा देगी, जब अपना प्रचंड रूप दिखा देगी, कलयुग में द्रोपदी स्वयं अपने वस्त्र बचा लेगी। कान्हा को आना ना होगा। जब शक्ति अपना बल दिखा देगी। थोड़ा वक्त लगेगा पर, वो हर राह सरल बना देगी। हर मुश्किल का हल दिला देगी। जंजीरों से छुड़ा लेगी, हर नारी को जलने से बचा लेगी, उसके साथ बुरा करने वाले को सबक सिखा देगी। जब शक्ति अपना रूप दिखा देगी। हर गुनहगार को सजा देगी, नारी की लाज बचा लेगी, हर नारी को झांसी की रानी बना देगी, जब शक्ति अपना रूप दिखा देगी। थोड़ा वक्त लगेगा पर ,संसार को सिखा देगी। नारी की ताकत समझा देगी। जन-जन को वह दिखला देगी। नई क्या है? यह शक्ति स्वयं आकर बता देगी। जब शक्ति अपना रूप दिखा देगी।